बेवजह blog

To experiment with words . . . to paint the canvas with audible colours.

May 2, 2017

पत्रकारिता के सरोकार और गाँधी

साथियों, हम अपनी बात संपादकाचार्य बाबूराव विष्णु पराड़कर की एक टिप्पणी से शुरू करेंगे, जो उन्होंने 1925 में वृंदावन में आयोजित हिंदी संपादक सम्मेलन में सभापति […]
February 9, 2017

निदा फ़ाज़ली साहब को याद करते हुए

  निदा फ़ाज़ली साहब को याद करते हुए, एक लेख जो आज ही के दिन पिछले साल(2016) उनकी वफ़ात पर मुझ से सुधांशु फ़िरदौस ने लिखवाया […]
January 29, 2017

बच्चों के लिए एक ज़रूरी किताब

बाल कहानियों से आप क्या चाहतें हैं ? बच्चों की कल्पना की उड़ान, जीवन व नैतिकता की ज़रूरी बातें और खूब सारी मस्ती… पर बच्चे बस […]
December 29, 2016

मिल जाए काश ऐसा बशर ढूंढते हैं हम

  अभिषेक की कॉल आई थी कि बहुत वक़्त हो गया है,  दद्दा से मिल आते हैं. उनके पाँव में हल्की सूजन भी रहती है तो अपने जानने वाले […]