बेवजह blog

To experiment with words . . . to paint the canvas with audible colours.

December 26, 2016

हर नक़्श-ए-पा बुलंद है दीवार की तरह

  मेरे दोस्त, मेरे हमदम, मेरे मोहसिन, मेरे करमफ़रमा, अभिषेक शुक्ला का एक मज़मून इन दिनों इन्टरनेट पर धूम मचा रहा है. ये मज़मून उन्होंने उस्ताद […]
December 23, 2016

Not To Have a Plan

  I’ve found myself falling in love with unfamiliarity too often. I hate routine. I crave for new beginnings every once in a while. The comfort […]
September 8, 2016

साहिर लुधियानवी का एक दुर्लभ इंटरव्यू

फिल्मी और अदबी दोनो तरह की शायरी में मुहज़्ज़ब मकाम रखने वाले मशहूर शायर साहिर लुधियानवी से १९६८ में  उर्दू के एक दूसरे बड़े शायर नरेश […]
September 8, 2016

बेवजह यात्रा: फुटकर यादें

  रानीखेत से कुछ दूर जंगलों से गुजरते हुए इस बात का अहसास हुआ कि जंगल कितना भी घना क्यों न हो एक पतली सी पगडंडी […]
September 8, 2016

अभिनेता और उसकी हैट

इस ज़िदगी के मंच में मैं अभिनेता ठीक-ठाक हूँ, बस जिस किरदार में हूँ उसमें मेरे सिर पर एक हैट है और मेरी हैट मेरे सिर […]
September 8, 2016

शकुंतला और जूलिएट

शकुन्तला का अन्त तो बहुत पहले हो गया था , अब जूलियट भी लुप्तप्राय है। जिन्होंने तब शकुन्तला को मार डाला था , वे ही अब […]
September 8, 2016

मिस्तरी पर भी लिखा जा सकता है क्या ?

पुराने लखनऊ में सिटी स्टेशन के पास एक छोटी सी गुमटी है, जहां स्कूटर मोटरसाइकिल वगैरह ठीक होती है. ये गुमटी जिन मिस्तरी साहब की है, […]